आज ही के दिन मिली थी हमको आजादी
जिसके लिए दी थी हमने करोड़ों कुर्बानी
पर क्या सही में आजाद हो पाएं हैं हम
दकियानूसी परम्पराओं से मुक्त हुए हैं क्या हम
गरीबी, भुखमरी, छुआछूत, भेदभाव, जात-पात
सड़ी गली मान्यताओं ने जकड़ कर रखा है
इनको खत्म किया जा सकता है लेकिन
नोटों की राजनीति ने इन्हें कस कर पकड़ रखा है
जो भारत कभी एकता ,अखण्डता की
पहचान हुआ करता था
वो आज एक दूसरे को
नोच नोच कर खाता है
किंतु फिर भी मन में विश्वास है
सत्य, अहिंसा, प्रेम जिसके दम पर बदल देंगे
तस्वीर भारत की ऐसा हथियार हमारे पास है
आसान नहीं है ये सब कर पाना
इतने सुहाने ख्वाब को हकीकत बनाना
लेकिन उम्मीद की किरणों के साथ
हमें आज तिरंगा है फहराना


