तमन्नाओं को डोर से बांध
जज्बातों की माला पिरोती हूं
कुछ अनछुए लम्हों को लिखकर
कागज के पन्नों पर नज़्म नई बनाती हूं
चिर निस्पंद ह्रदय से नत होकर
मृदु कलियों की सुरभि का रूप चित्रित करती हूं
छलकता बादल जब असीम व्योम से
वेदना की वीणा पर अवसाद के राग गाती हूं
सतरंगी इन्द्रधनुष की छटाओ में
स्मृति उर में भरकर जीने का मर्म जगाती हूं
फेंककर गमों की चादर तम में बन जुगनू
आह को वाह में ढाल सपने नये सजाती हूं
पिंकी
@pinkrose0113


