रहबरी है मुख्तार वो मेरे यार का
शबाब हो या शराब नशा अभी बाकी है
चश्म_ए_साकी कुछ पिलाई इस तरहा
दीदार_ए_यार इश्क में अभी बाकी है
मौसम_ए_बहार की खुमारी कुछ ऐसी छाई
हुस्न_ए_रानाईयों की सौगात अभी बाकी है
महफ़िल_ए_दुनियां को इस कदर ठुकरा दूं
निशात_ए_नूर में भीगी रात अभी बाकी है..
@pinkrose0113
