कुछ दिनों पहले पारित हुआ है एक बिल,
सुना है महिलाओ को कुछ और आज़ादी गई है मिल,
विवाह करने की क़ानूनी उम्र अब इक्कीश होगी,
जीवन के बड़े बदलाव से पहले युवतीया और समर्थ होगी,
निर्णय निसंकोच सराहनीय है,
पर औरत की दशा आज भी चिंतनीय है,
एक तरफ हम उनके अपने पैरों पे खड़े होने की बात करते है,
दूसरी तरफ खुद ही बहुत उनका साथ देने में पीछे रहते है,
ऐसा नहीं की हर एक की यही असुविधा है,
पर बहुत बड़े हिस्से की ये दुविधा है,
फैसले लेना खुदके रोटी मकान सा ही सब को जरुरी है,
इस हर एक में नारी का भी होना उतना ही जरुरी है,
मोहताज़ नहीं वो किसी की कदमो को चलने तो दो,
कमज़ोरियों से ऊपर हमें कभी देख तो लो,
उम्मीद है की हम और आप भी इस आगे बढ़ती दुनिया में
आगे मिलेंगे,
औरत को किसी की माँ बहन बेटी बहु के साथ-साथ उसकी अपनी पहचान से पहचानेंगे |
- पिंकी झा

