तुम्हे रोकना चाहती थी मैं ,
कुछ भी करके,
सारी ताकत लगा के,
लेकिन तुम चले गए ,
बहुत दुर इस दुनिया से,
तुम चले गए |
लेकर साथ बहुत कुछ ,
तुम्हारी हसीं जो किसी को भी हँसा दे ,
तुम्हारे हौसले जो उड़ना सिखा दे,
मेरे जीने की वजह ,
और शायद मुझे भी लेकर ,
तुम चले गए |
मेरा भी कुछ कुछ लेकर गए हो ,
तुम्हारे वापस आने का इंतज़ार ,
घंटो होनेवाली बातें ,
तुम संग बिताना वक़्त,
चुरी, बिंदी, सिंदूर और बाकी श्रृंगार ,
और मेरा मन लेकर ,
तुम चले गए |
बाक़ी नहीं लगता जिंदगी में कुछ भी ,
न खुदसे मर जाना गवारा है ,
तुम कहते थे ,
अपने लिए भी जीना सीखो ,
लो तुम्हारी बात मान ली ,
जी लेंगे जब तक साथ है यादें तुम्हारी ,
क्योकि मुझे तो छोड़कर ,
तुम चले गए |
- पिंकी झा


