शिव की अपनी अलग बात है,
वो देवता होकर भी बंधू से है,
औरो का नहीं पता,
हमे लगते हमारे सबकुछ से है l
नज़रे खोलो तो , देखो तो
जीवित भी शिव , जीवन भी शिव l
मृत भी शिव , मृत्यु भी शिव l
स्वाश भी शिव , वायु भी शिव l
मंत्र भी शिव , जाप भी शिव l
तंत्र भी शिव, तांत्रिक भी शिव l
जड़ भी शिव , चेतन भी शिव l
कैलाश भी शिव , धरती भी शिव l
नर भी शिव , नारायण भी शिव l
संगरक्षक भी शिव , संहारक भी शिव l
प्रार्थना भी शिव , फल भी शिव l
भोजन भी शिव , भजन भी शिव l
व्रत भी शिव , पारण भी शिव l
शरीर भी शिव , आत्मा भी शिव l
प्रेम भी शिव , प्रेमी भी शिव l
दंड भी शिव , दण्डित भी शिव l
पीड़ित भी शिव , पीड़ा भी शिव l
कारण भी शिव , निवारण भी शिव l
माया भी शिव , मोक्ष भी शिव l
तुम भी शिव , मैं भी शिव l
हम सब शिव , हर कण में शिव l
आंखे देखे जितना, देख सके जितना,
वो सब शिव l
हम शिव में लीन, शिव हम में लीन,
हम सब एक ही l
- पिंकी झा


