सवाल कैसी हो ? ठीक हो ? अच्छी हो ? 

जवाब, ठीक ही हूँ , हाँ ठीक हूँ , अच्छी हूँ , 

न सवाल ही सही , जवाब भी झूठे ,

जो सच है बताओ न ?

जैसे भी हाल में हो छुपाओ मत , 

ऐसा सवाल कोई क्यों नहीं पूछता ?

और जवाब में सब ठीक है कहना इतना जरुरी क्यों? 

सच स्वीकार उसे कहना इतना कठिन क्यों? 

हाँ मैं बिलकुल ठीक नहीं, 

मदद की जरुरत है , 

कर सको तो कर दो जरा , 

इतना कहना तक नहीं बनता , 

झूठे सवालो और जवाबो का सिलसिला ख़तम नहीं हो रहा , 

बस सच वही स्थिर है , 

बदलने का नाम नहीं ले रहा |

- पिंकी झा