कितना हसीन ये वक्त है ,
तुम साथ हो, पास हो मेरे ,
हर पल बीतता तुमसा ही खास है ,
रोकना चाहती भी हूँ कभी इन्हे ,
कभी बस छोड़ खुला जीने का मन करता है,
इन्हे यादों की किताब में सहेज कर लिखने का जी करता है,
सब कुछ ध्यान देती हूँ हमारे बीच का ,
छोटा ही हो या बड़ा ही क्यों ना हो ,
तुम्हारा हाथ पकड़ मजबूती सी लगती है,
गले लगाकर दुनिया बाहों में लगती है,
आँखों में देख उनमें बस जाना है ,
मुस्कराहट जीनी है तुम्हारी ,
गुस्सा भी शांत करना है ,
लड़ते-लड़ते वजह भूलकर साथ बैठना है,
तुम्हारे कंधे पर एक छोटा घर बनाना है ,
बातें सच्ची-झूठी सारी मान लेनी है |
मशगूल जब का कामों में रहते हो,
निहारना तुम्हें अजीब और अच्छा भी लगता है ,
सब जो मेरा, तुम्हारा है अभी,
उसे हमारा बनाना चाहती हूँ,
कुछ हरकतों पर प्यार आता है तो,
नज़र चुपके से उतार लिया करती हूँ ,
बस अब जिंदगी के और आयामों पर भी साथ पहुँचना है,
जितने नजदीक हम है
अपने से जुड़ा सब भी इतना नज़दीक करना है,
मांगना कुछ हो अगर तो,
तुम्हे, तुम्हारा साथ ,तुम्हारा सब अपने साथ मांगना है,
चाहती हूँ आगे तुम्हारे साथ ही चलू,
पर भगवान न करे ,
ऐसा नहीं हुआ तो ,
बाकी जिंदगी काट लुंगी,
हमारे सफर की यादों के साथ |
- पिंकी झा


