कितना अच्छा होता अगर संवेदनशीलता खत्म हो जाती , 

सिर्फ लोगो के अंतःकरण से ही नहीं बस , 

पूरी दुनिया से ही खत्म हो जाती, 

बस गायब , जैसे कभी थी ही नहीं, 

और अब कभी लौटेगी भी नहीं,

ऐसा हुआ तो कितना अच्छा होगा, 

दर्द बस अपने सहने परते , 

सच्ची या झूठी बातें किसीके गम में कहनी न पड़ती , 

रिश्ते बोझ से न लगते , 

साँस खुलकर ले प ाते रिश्तो में, 

अपने को ठीक से संभालना ही काम होता, 

साथ निभाना भी इतना जरुरी न होता, 

एक विचार है बस, 

संवेदनशीलता खत्म हो जाती तो कैसा होता ?

- पिंकी झा