इश्क़ को लफ्ज़ो में बया करने का रिवाज क्यों ?
बिन कहे कोई समझे न क्यों?
शब्दो में बांधकर सिमित करते क्यों?
एहसास की कुछ कीमत नहीं क्यों?
नज़रो की भाषा पढ पाते़ न क्यों?
हाथ पकड़ भी कुछ समझ पाते न क्यों?
पास रहकर भी दूर इतने रह जाते क्यों?
इश्क़ होकर भी शब्दो से हार जाते क्यों?
कह न सके इसलिए इश्क़ अधूरे रह जाते क्यों ?
- पिंकी झा
