रात खुद में ही रहष्यमयी बहुत है, 

किसी के लिए मिलान की रात,

किसी के लिए विरह की रात ,

किसी के लिए चैन की नींद की रात ,

किसी के लिए बिन नींद की रात ,

किसी के लिए सब भूलाने की रात ,

किसी के लिए सब याद आने की रात ,

किसी के लिए जल्दी न ख़त्म होती रात ,

किसी के लिए यूही बीत जाती रात ,

किसी के लिए खुदको समेटने की रात ,

किसी के लिए पूरी तरह टूट जाने की रात ,

किसी के लिए सुबह की पकी उम्मीद रात,

किसी के लिए आखरी उम्मीद रात, 

किसी के लिए खूबसूरत रात, 

किसी के लिए काली सियाह रात ,

किसी के लिए इंतज़ार की रात ,

किसी के लिए आखरी रात ,

और क्या क्या कहे ,

निष्कर्ष यही है, 

ये रात रहष्यमयी बहुत है |

- पिंकी झा