
ग्रीष्म की गर्मी बीती,
सावन की बरसात बीती,
शरद का सुहानापन बिता,
शिशिर की ठिठुरन बीती,
आया बसंत हरियाली लिए ,
ऋतुए आती-जाती रही
आये नहीं हमारे प्रिये |
सुबह आयी सूर्य देव संग ,
दोपहर को पुरी तेज़ी पर वो ,
सांय हुई डूबे सूर्य,
उगे चंद्र देव भी ,
अँधेरा बढ़ता गया,
उजाला कहि नहीं ,
चलता रहा ये सिलसिला,
ह
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