पति है वो मेरे,
कहते सब मेरे परमेश्वर ,
पहचान उनसे होती मेरी,
मैं उनकी पत्नी,
उनके बच्चों की माँ,
बहु उनके घर की,
गृह लक्ष्मी कहलाती ,
मेरी अपनी पहचान याद नहीं,
कभी-कभी अपना नाम भी भूली ,
सुना है जो उनका,
उतना वो मेरा भी ,
फिर उनकी गलतियाँ बस नादानियाँ,
और मेरे गुनाह नज़ाने क्यों?
मेरे हिस्से जवाब देहि,
उनके हिस्से सिर्फ शाबाशियां क्यों?
- पिंकी झा
