आँखों में भरे आँशु क्यूँ ?
बस धारा बने बहते चले जाते ,
तकियों को गिला करते ,
सिसकियों को गिनती काली रात ढलती ,
सुकून नींद बन नहीं मिलती ,
आँखों में भरे आँशु क्यूँ ?
पता नहीं |
कारण इनके पीछे क्या ?
मेरी मनः स्तिथि से खुद मैं अनजान ,
कही अकेलापन तो नहीं ,
करोड़ो में कहने को अपना गम कोई नहीं ,
खाली दिल तो नहीं ,
जो बाटे खुशियाँ उसे ख़ुशी से भरने को कोई नहीं ,
आँखों में भरे आँशु क्यूँ ?
पता नहीं |
निवारण बस इतना ही हो सकता शायद ,
बहा दू भरे भाव सारे बूंदो संग,
थाम लू खुदको संग लिए अपने रंग ,
खाली जितना भी हो सब ,
खुद अपने लिए मैं हू खड़ी ,
आँखों में भरे आँशु क्यूँ ?
पता नहीं |
सब समझा कर खुदको ,
चलती आगे सूरज निकले जब ही ,
फिर रात मिलती उन्ही ख्यालो ,
और आँशुओ संग वहीं ,
आँखों में भरे आँशु क्यूँ ?
पता नहीं |
- पिंकी झा


