लगभग डेढ़ साल बाद उनसे मुलाकात होगी ,
मुश्किल है पर शायद थोड़ी बहुत बात होगी ,
बहुत दिनों बाद खुदको सजाया है ,
आँखों में हल्का काजल लगाया है ,
कपडे चुनने बदलने में वक्त गवाया है ,
दीखते मोटापे को थोड़ा छुपाया है ,
ख्याल बहुत से है की मिलकर क्या होगा ?
मन में हल चल सी मची है की,
अब जब वो जानते है मेरी मन की बात ,
और मैं भी उनके मन की ,
तो उनका बरताव पहले सा ही या बदला होगा ,
एक छोटा कोना मन का ये भी चाहता है ,
वो आज नहीं न सही कभी तो किसी तरह मेरा होगा ,
मिले हम ,
भीड़ में बहुत से लोगो के बीच ,
मैंने तिरछी आँखों से उन्हें देखा ,
दिल ने कहा 'हाय' ,
और दिमाग ने उनका जवाब क्या था याद दिला दिया ,
और कुछ न मुझसे कहा गया ,
मुलाक़ात ख़त्म यही हो गयी ,
है और कुछ नया क्या ?
- पिंकी झा


