जबान साफ़ है मेरी ,

बातें बेबाक है मेरी ,

मन का सब सामने है मेरी ,

इसलिए लोगो को गलत पहचान है मेरी |


छुपाना भावनाये आदत नहीं मेरी ,

गुस्सा,प्यार,लगाव,बेपरवाही सब ज़ाहिर है मेरी ,

बर्दास्त न हो कुछ कोई शिकायत हो मेरी ,

मुझसे ही कहना गलत सही सब सुनूंगी , 

वैसे भी आजकल सब की सुनना आदत है मेरी |


खामिया बहुत सी है मेरी , 

सब सी कुछ तो, कुछ अलग है मेरी , 

फिर भी जैसी हूँ यही पहचान है मेरी , 

उनके लिए उपलब्ध नहीं मैं , 

जिन्हे कद्र नहीं मेरी |


- पिंकी झा