मत कहना किसी से कि,

क्या ख्वाब है तुम्हारे ?

जीते हो तुम जिनके सहारे, 

सोचते क्या हो ?

कहा देखते हो खुदको, 

बेचैनी है जिनकी वजह से ,

रुकते नहीं हो ,

लगे रहते हो दिन-रात ,

उधेड़ बून में जिनकी, 

डगमगा कर भी सँभालते हो ,

उन्ही के लिए ही ,

मत कहना किसी से तभी तक, 

सच न कर लो जब तक, 

इसलिए नहीं की तुम्हे कोई डर है,

या तुम में कमी है , 

बस इसलिए कि,

तुम्हारा सबकुछ बस माखौल न बने किसीका,

घबड़ा न दे तुम्हे चंद की हँसी ,

क्युकी आसान नहीं है ख्वाब देखना भी, 

इस रोज़ बदलती दुनिया में, 

उन्हें जिन्दा रखना भी ,

इसलिए लगे रहो अपनी कोशिशों में बस, 

सब पूरा होगा जरूर विश्वास रखो बस, 

बाकि कुछ भी अभी,

मत कहना किसी से |


- पिंकी झा