मर जाना आसान बहुत है , 

बस एक नस काट ली , 

नींद की गोलियाँ खा ली , 

कुछ भी करके साँसे खत्म कर ली , 

बस रिस्ता ख़तम जिंदगी से , 

चलो जान छुटी , 

मुश्किल तो जीना है , 

रोज़ उम्मीद बांध आगे बढ़ना , 

सपने टूटते देखना , 

फिर भी जोड़कर उन्हें आँखों में रखना , 

लोगो की बाते सुनना , 

मन को भटकने से रोकना, 

अपनी गलतियों पर खुदको टोकना, 

कभी गेरो के लिए तो कभी अपने लिए लड़ना , 

रोज़ थककर वापिस उठना , 

जब जिंदगी बोझ सी लगने लगे , 

सच्ची झूठी उम्मीदों के लिए ,

कभी परिवार ,कभी प्यार,

कभी दोस्त यार ,कभी अपने लिए ही सही 

जीते रहना आसान नहीं |

- पिंकी झा