माँ तुम एक बरस बाद आयी हो , 

लगता है सदियों बाद आयी हो, 

इंतज़ार बच्चों का खत्म करने आयी हो, 

सिंह पर सवार सबका कल्याण करने आयी हो, 

दुःख में बीत रहा समय ये नव उम्मीद ले आयी हो, 

आँसू बहुत बहाये है माँ , 

अब अपनी चरण में शरण दो, 

गोद में सर रख लू तेरे, 

सो जाऊ भूल सब दुनियादारी, 

तुम तो अपनी हो तुम्हारे आने की क्या तैयारी , 

अपने छूटे बहुत से, 

सपने भी टूटे बहुत से, 

मेरा सब सौप दिया है तुझे , 

जो ठीक लगे वो करदे , 

इस नवरात्रि नव प्रकाश जन-जन में भरदे |

- पिंकी झा