हल चलाता हूँ मैं , पर मेरी समस्याओं का कोई हल नहीं,
अनाज के भंडार भरता हूँ मैं , पर खुद के लिए ही बचता अन्न नहीं,
दूध की नदियाँ बहाता हूँ मैं , पर मेरे घर तक उसकी कोई नहर नहीं,
इंद्र, धरती आदि देवो से प्रार्थना करता हूँ मैं , उस प्रार्थना का फल मेरा नहीं ,
काम ढेर सारे करता हूँ मैं , पर ये सब मेरे काम का नहीं,
धुप की, बरसात की, ठण्ड की मार सहू मैं , पर उनपर मरहम तक लगाने को नहीं,
चिंता कईयों की करता हूँ मैं , मेरी किसीको चिंता ही नहीं,
बोझ ढोऊं कई घरो का मैं , मेरे घर का बोझ ढोने में सहारा तक कोई नहीं ,
चर्चा का विषय मेरी समस्याएं , पर चर्चा के बाद भी निवारण कोई देता नहीं,
चुनाव के वादों में सबसे आगे मेरा ही नाम , वादे पुरे करने कोई आता ही नहीं,
जीवन बाटू घर-घर मैं , मेरी मृत्यु तक पर कोई आता नहीं,
मैं कौन ? एक छोटा सा किसान ,
सुना है अनमोल हूँ , पर मेरा कोई शायद मोल ही नहीं |
- पिंकी झा


