
मैं अमावस के अँधेरे मे खोजती रौशनी, तुम पुनम का चाँद,
मैं बारिश का बेहता पानी, तुम कागज़ की कश्ती,
मैं श्रृंगार किसी का, तुम असली खूबसूरती,
मैं रेत का रेगिस्तान, तुम जलकूप रेगिस्तान मे,
मैं चेहरे की छोटी मुस्कान, तुम जोर से लिया ठहाका,
मैं भगवान को अर्पित पुष्प,
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