मैं अमावस के अँधेरे मे खोजती रौशनी, तुम पुनम का चाँद,

मैं बारिश का बेहता पानी, तुम कागज़ की कश्ती,

मैं श्रृंगार किसी का, तुम असली खूबसूरती,

मैं रेत का रेगिस्तान, तुम जलकूप रेगिस्तान मे,

मैं चेहरे की छोटी मुस्कान, तुम जोर से लिया ठहाका,

मैं भगवान को अर्पित पुष्प, तुम धुप का सुगंध,

मैं पूजा की आरती, तुम पूजा का प्रसाद,

मैं स्वर वर्णमाला की, तुम वर्णमाला के सारे व्यंजन,

मैं अंक बाकी बचे, तुम शून्य आर्यभट का,

मैं माता पारवती सी शायद, तुम शिव से देव, 

मैं अधूरी तुम्हारे बिन, तुम मेरे बिना अधूरे l

- पिंकी झा