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लिखती हूँ

लिखती हूँ जो मुझ पर है बीती, 

लिखती हूँ जो औरो पर बीतते है देखी , 

थोड़ा झूठ कभी , थोड़ा सच लिखती हूँ , 

बस कुछ अफ़साने लिखती हूँ , 

जो आँसू बह न पाए आँखों से, 

उन्हें स्याही से बहाया करती हूँ , 

जो चीख चीला न सके , 

उन्हें अपनी कलम से लिखती हूँ , 

जो कहना चाहिए था कह न सके , 

वो बातें कागज़ो पर लिखती हूँ , 

अपनी छोटी कोशिशें लिखती हूँ , 

यु तो इश्क़ कहना गलत नहीं,&nbs

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