कितनी जोर से हसंती है |
आंखे ऊँची कर बात करती है |
बड़ो से जबान लड़ाती है |
आदमियों के सामने कुछ कहने से नहीं डरती है |
देर रात तक बाहर रहती है |
लड़को के संग टहलती है |
जबान कैंची की तरह चलती है |
इतनी उम्र हो गयी शादी नहीं करती है |
माँ बाप का बोझ बन बैठी है |
इतनी पढ़ाई क्यों करती है ?
घर के काम न करती है |
इतना क्यों सजती है ?
ये सब सुनती है लड़किया ,
कितनी आसान होती है हमारी जिन्दगिया |
- पिंकी झा


