सब अकेले आजकल ,

दिल सभी के टूटे, 

सब रूठे-रूठे ,

सब नाखुश , 

ग़मो से भरे , 

नाउम्मीद से, 

दोष सब दुनिया के नाम किये, 

पर क्या तुमने साथ दिया किसीका , 

दिल कभी जोड़ा कोई, 

मनाना चाहा क्या किसी को , 

हसी छोटी सी बाटी किसी से , 

गम भर खुद में किसी के महसूस किये,

उम्मीद बाटी कभी , 

नहीं न , 

फिर तो कुछ गलत कहा हो रहा है |

- पिंकी झा