सादे से आम लिबाज़ में ,
संग कागज़ और कलम लिए ,
निकलते बाटने अपनी बुद्धि ज्ञान जो,
माँ सरस्वती का रूप हमारे जीवन में,
कोई और नहीं शिक्षक है वो |
कहानी दुसरो की के सूत्रधार वो,
छूट भी जाए अगर बात होनी,
जहन में रहती हमेशा बातें सिखाई उनकी,
जिनकी झोली खली नहीं बाटने को,
कोई और नहीं शिक्षक है वो |
माँ-बाप पहले शिक्षक जीवन के,
जीवन भर सीखते रहे उनसे कुछ ,
जीवन दिया उन्ही का तोहफा,
जीवन से बड़ा शिक्षक है कौन ,
हर कदम सीखते रहे हम , सिखाते रहे वो,
कोई और नहीं शिक्षक है वो |
धन्यवाद काफी नहीं पर इससे ज्यादा क्या ही मैं दू ,
गुरु दक्षिणा यही होगी आपसे मिला ज्ञान जो किसी से थोड़ा बाट लू,
जिंदगी के हर मोड़ पर सफल वही सीखता रहा है जो,
नमन उन सभी को जाने अनजाने सिखाते रहे है जो,
जीवन का आधार ,
जिनसे मिली थोड़ी डाट और बहुत सा प्यार,
कोई और नहीं शिक्षक है वो |
- पिंकी झा


