कितना आसान है किसीके सपनो को झुटला देना ,

ये कह देना की तुम लायक नहीं हो इन्हे देखने को ,

कुछ शब्द ही लगे किसीको को मारने को , 

हाँ कतल किया है तुमने उसकी जिंदगी का , 

क्युकि वो सपने ही तो साँसे बन चल रहे थे, 

रगो में उम्मीदें बन दौड़ रहे थे , 

मुश्किलें बड़ी भी कोशिशों से कम हो रही थी ,

इस दुनिया, जहाँ जीना रोज मौत से मुश्किल है ,

अपने सपनो के सहारे जिंदगी उसकी चल रही थी , 

पर तुम्हें ये गवारा न हुआ , कह दिया , सब तोड़ दिया ,

समझा कर कह सकते थे कुछ नहीं तो सलाह दे सकते थे, 

पर तुमने एक खून करना ज्यादा सही समझा ,

हो गयी है मौत उसके सपनो की साथ में उसकी भी ,

जिन्दा लाश देखकर खुश बहुत होगे तुम ,

इस जुर्म की कोई सजा नहीं है पर याद रखना ,

खूनी हो तुम | 

- पिंकी झा