नींद अपनी किसी और को देकर खुद सोते नहीं ,
हंसी अपनी किसी और को देकर तंग होते नहीं,
दुःख सह लेते सारे और कुछ कहते नहीं,
कराहते तकलीफ में और शिकायते अपनों से करते नहीं ,
सबकुछ जानकर भी सब बताते नहीं,
कौन कहता है की मर्द रोते नहीं?
कन्धा अपना देकर अपने लिए कन्धा मांगते नहीं,
सच बर्दाश्त कर दुसरो को सच कहते नहीं,
इश्क़ करते है इज़हार करते नहीं,
आँसू पोछते है सबके अपने आँसू दिखाते नहीं,
कौन कहता है की मर्द रोते नहीं ?
- पिंकी झा


