कठिन परिस्थियों से लड़कर,
अपमानों को अपनाकर,
धीर और गंभीर रहो,
जीतो सब डटे रहो,
इस युग के तुम,
कर्ण बनो |
छीने हक तुमसे कोई कितना भी,
झोपड़ियों में रहकर महल बुनो,
रोन्धे कुचले जाने पर भी,
घाव लिए भी अडिग रहो ,
स्वार्थ और त्याग में स्वाभिमान चुनो,
इस युग के तुम ,
कर्ण बनो |
सत्य असत्य की लड़ाई में,
कर्म का पथ चुनो,
सत्रुओ की भीड़ में ,
सच्चे मित्र बनो ,
नकली समबंधों की दुनिया में ,
कुंती और राधा के सच्चे पुत्र बनो ,
इस युग के तुम ,
कर्ण बनो |
जीवन क्या है ?
बस एक संघर्ष मात्र ,
इस संघर्ष के महारथी बनो ,
अपराधों से चरित्र न मलिन करो ,
समय हो महाभारत का या कोई भी,
परचम लहरा अपना पराक्रमी बनो ,
सारी कठिनाईयाँ चिरकर,
इस युग के तुम ,
कर्ण बनो |
- पिंकी झा

