मेरी नज़रो में गौर से देखो तो सही ,
ये शर्म इनमे क्यों जानो तो ,
ख्याल - सपने कैसे इनमे पहचानो तो ,
स्थिर होती है किसपे जानो तो ,
चमक भर जाती है क्यों इनमे निहारो तो,
तुम्हारी नज़रो से मिलने में कतराती क्यों पूछो तो ,
कुछ सवाल तो करो ,
कुछ ख्याल तो करो ,
जवाब तुम जानते हो शायद सभी ,
कहीं इनका जवाब तुम ही तो नहीं |
- पिंकी झा
