जन्मदिन में अब वो पहलेवाली बात नहीं, 

बचपन की तरह इंतज़ार नहीं रहता , 

अब ये एक दिन खास नहीं लगता , 

सबको चलते फिरते अब नहीं बताते, 

स्कूल भागे-भागे ख़ुशी से अब हम नहीं जाते, 

सूजी के हलवे का बना केक अब कहा खाते , 

उम्र बढ़ने की ख़ुशी नहीं गम ही पाते , 

कुछ टोफ़िया बाट कर खुश नहीं हो जाते, 

बधाइयों का धन्यवाद बेमन से करते जाते, 

तोफों में ख़ुशी नहीं ढूंढ पाते , 

बस तारीख याद रख जाते, 

जन्म लेने की ख़ुशी कहा मनाते , 

बड़े हो गए है इसलिए शायद , 

जन्मदिन में अब पहलेवाली बात नहीं |

- पिंकी झा