घर वापस आई,
की थोड़ी सफाई,
हुई बरतनों की धुलाई,
एक कप चाय बनाई,
तीन रोटियाँ पकाई,
सब्जी फीकी बनाई,
करली थोड़ी पढ़ाई ,
इन सब में माँ रह रह कर याद आई,
अपना शहर यूही छोड़ आई,
रोज़ चलती है जीने की लड़ाई,
बड़ी मेहनत से रोटी कमाई,
जीवन यही है लगे रहो मेरे भाई |
- पिंकी झा

