हो कठिनाई में जितनी भी आगे भागना,

हो जाए जो भी अपने सपने मत त्यागना,

आसान ना होगा ये मानती हू ,

पर आसान इस जीवन में कुछ हुआ है कभी ,

प्रलोभन बहुत से आयेंगे राह बदलने के , 

कुछ बड़े ओहदों के,

कुछ बहुत से पैसों के , 

मन दुसरी ओर जाना चाहेगा,

उन देखें सपनों को पीछे छोड़ना चाहेगा , 

बस दो पल रूककर ज़रा सोचना ,

पहली बार देखकर वो सपना, 

क्या भाव था टटोलना , 

पुरे होने पर ख़ुश कितना होंगे सोचना , 

जमाना लोग रहेंगे यहीं , 

तुम कहाँ पहुँचना चाहते हो ना भुलना , 

हो जाए जो भी अपने सपने मत त्यागना |

- पिंकी झा