भाषा सिर्फ भावना व्यक्त करने का जरिया नहीं, 

हर किसी के व्यक्तित्व का अभिन्न हिसा , 

हिंदी भासा मात्र नहीं एक भावना , 

रक्त जैसे रगो में बहे , 

गली , मोहले , नुकरो पर बोली जाए , 

भारत का हर कोना इससे परिचित , 

राष्ट्र का गौरव , ये सम्मान बढ़ाता , 

लेखक , कवि , कलमकार इसके पूजक, 

उनके घर की रोटी चलती इससे, 

मन में छुपी बात बोले इसी के सहारे , 

जहा देश का नाम वहा हिंदी भाषा का भी , 

हिंदी केवल भाषा नहीं एक भावना |

- पिंकी झा