हम निकलते है बाहर दुनिया में,
सपनो का एक बस्ता लिए,
घर की तलाश में,
खुद की तलाश में,
मिलता थोड़ा-थोड़ा सब है,
बस घर कह सके जिसे हक से नहीं मिलता,
तय करते है जब तक हाँ यही अपना घर है,
सफर वापस रास्तो पर बुला लेता है,
बस घर नहीं मिलता l
-पिंकी झा


हम निकलते है बाहर दुनिया में,
सपनो का एक बस्ता लिए,
घर की तलाश में,
खुद की तलाश में,
मिलता थोड़ा-थोड़ा सब है,
बस घर कह सके जिसे हक से नहीं मिलता,
तय करते है जब तक हाँ यही अपना घर है,
सफर वापस रास्तो पर बुला लेता है,
बस घर नहीं मिलता l
-पिंकी झा