बसंत ऋतू सुहानी ,
फ़रवरी का महीना ,
अकेले है मुश्किल जीना ,
प्रेम का व्यापार चरम पर ,
बहुत कुछ चल रहा भरम पर ,
गुलाबो के बागान उजड़े कितने ,
प्यार जताने और दिखाने में ,
दिल मिले हज़ारो एक हुए,
तो कुछ टूट पहुंचे मयखानो में ,
वादे अनेक युगलो के ,
कुछ प्यार कुछ जीवन भर निभाने के ,
तोफे भी जरिया हुए इश्क़ जताने के ,
ख़ुशी का माहौल दिल भर जाता है ,
चारो और फैला इश्क़ देख ,
अकेले चलना बस थोड़ा खल जाता है ,
बसंत ऋतू सुहानी ,
फ़रवरी का महीना ,
सब के लिए कहा एक सा आता है |
- पिंकी झा
