दिलगी दिलगी सी आसान नहीं अब,

मुश्किल है जो भी है सबका सब ,

टकराकर रास्तो पर साथी मिलते नहीं अब ,

रब के इशारे समझते कहा सब ,

निकलते है अंधेरो में दिल लिए जब ,

आस सी होती कोई संभाल ले इसे अब ,

पर कोई मिलता नहीं मिलता है जब ,

लौट जाते है घर चुपचाप तब ,

बंद कर दिये जाते है बक्से में सारे ख्यालो ख्वाब सब ,

चाभी रख दी जाती है जहा मिले नहीं हमे भी खोजे जब , 

क्योकि दिलगी दिलगी सी आसान नहीं अब |

- पिंकी झा