भ्रम था मुझे बहुत चीज़ो का,
कुछ सचाईयो का,
कुछ झूठी बातों का,
अब टुटा है ,
तो होश आया है ,
सचाईयो में जीने का जोश आया है ,
रौशनी में रहना राश आया है ,
नुक्सान हुआ बहुत अपनों का,
अपना सबसे ज्यादा हुआ,
खैर संभल जायेंगे,
संभाल सब लेंगे,
भ्रम में आँखे बंद थी बहुत दिनों तक ,
अब आँखे खोल जीएँगे |
- पिंकी झा


