बातें कहने को ही बानी है ,
मन में तो कुछ और रखना चाहिए ,
सोच ती हूँ कह दी होती मैंने भी कुछ बातें ,
मन की तो होता अलग बहुत कुछ,
कह दिया होता अगर की ,
तुम से मोहब्बत है,
थोड़ा मोड़ा नहीं बहुत है ,
तुम बिन जीना बस समय काटना है ,
साथ तुम्हारे सब बाटना है ,
हाथ पकड़ रास्तो को भापना है ,
एक सिराहने से चाँद तारो को ताकना है,
मैं जिक्र न करू तुम्हारा ऐसी कोई बातना है ,
पर मुझसे कहा नहीं गया एक भी शब्द ,
लोग जमाना क्या कहेगा सोचते निकल गया वक्त ,
हम बस तन्हा ही रह गए ,
कोई और कह गया मन का सब ,
इसलिए बातें हमेशा मन की कह देनी चाहिए |
- पिंकी झा


