बहुत बदल गया हूँ मैं ,

किसी ने कहा ,

सही ही तो कहा ,

रुकता नहीं हूँ अब रास्तों पर किसी का इंतज़ार कर , 

गिरता अब भी हूँ पर खुद ही उठता धूल झाड़कर , 

अपने आप को भी रखता हूँ संभलाकर , 

अपने कौन है समझ लिया है पहचानकर , 

ख़ुशी ही होती है खुद का खुद ही हूँ जानकर , 

हस्ता भी हूँ आजकल जाँचकर , 

मैं टूटता नहीं अब छोटी-छोटी बातपर , 

रोता नहीं अब रोनेवाली भी बातपर , 

मन अब नहीं कहता की प्यार कर , 

अदाकारी सिख ली अब रोज जीता हूँ नए किरदार कर , 

किसी ने बिलकुल सही ही कहा , 

बहुत बदल गया हूँ मैं |

- पिंकी झा