थक गई हूँ मैं , 

बस नज़रो से बातें करते-करते , 

उनमे कुछ और , 

जुबान पर कुछ और सुनते-सुनते , 

बस ख़याली दुनिया में , 

साथ ही साथ रहते-रहते , 

अपनी बात तुमसे नहीं , 

बस खुद से कहते-कहते 

अब हो जाना चाहिए आर-पार , 

सच या झूठ सिर्फ,

सही गलत के पार , 

सुन लो मेरी दिल की , 

या कह दो अपने ही दिल की , 

बस बीच में न रहो न रहने दो , 

है कुछ दर्मिया या खाक है, 

सच जानकर तसली में रहने दो |

- पिंकी झा