आज आँखों में न जाने किस बात पे आँसू है,
बीती न बीती और बीत रही हर बात पे आँसू है,
अपनी हर हार के आँसू है,
पीठ पर सारे वार के आँसू है,
हर अनकहे जस्बात के आँसू है,
सख्श रोक न सके जिन्हे उनकी याद के आँसू है,
रब से करती फ़रियाद में आँसू है,
टूटने के दर्द के आँसू है ,
अंदर घुट रही चीख के आँसू है,
खोखली होती देखते अपनी नीव के आँसू है,
बात जो भी निकले आज उस बात पे आँसू है,
खो रहे बहुत कुछ पर थोड़ा-थोड़ा ,
खुद को भी इस बात के आँसू है,
जीना पड़ेगा सब खोकर भी उसी के आँसू है,
आज सपने, उम्मीद ,उमंग या कुछ और नहीं ,
इन आँखों में बस आँसू है ,
हर एक बात पे आँसू है |
- पिंकी झा


