जब अंधेरे में जिए ,

तो जाना रोशनी कितनी खूबसूरत थी ,

ये सच जानने की जरुरत थी ,

रोज बस इंतज़ार की रोशनी आज आएगी ,

और फिर उजाले से जिंदगी भर जाएगी ,

दिन कट रहे थे धीरे-धीरे ,

उम्मीद कम हुए जा रही थी धीरे-धीरे ,

आँखों ने अपना लिया था अँधेरे में देखने का ढंग ,

जानते नहीं थे देखेंगे क्या कभी अब कोई रंग ,

सपने देखते थे अब ना के बराबर , बहुत कम, 

टूटी उम्मीदे जब खत्म सी होने लगी,

एक दिन अचानक ही ,

एक छोटी सी किरण उजाले की घर मेरे आने लगी ,

ये देख लगा ज़िंदा रह तो लेते अँधेरे में भी शायद 

पर उजाले बीना जान ना पाते जिंदगी क्या है |

- पिंकी झा