माहौल अजीब बड़ा आजकल ,
घर पर सब ठीक-ठाक लगे ,
समाचारों में अलग छवि दिखे ,
बाहर निकलने पर कोई और सच मिले,
भरोसा किस पे करें ,
हिसाब औरो की स्तिथि का ले,
की अपनी परेशानियों से लड़े ,
तंग हाल दुकानें क्या कहती है सुने ,
या बढ़ती ठेलियो की संख्या गिने,
या फिर डाटा जो कहते सच वही माने ,
सब नियंत्रण में हम बस इतना जाने,
आँखे जो दर्द कहती उसे कोई क्यों माने ,
माहौल अजीब बड़ा आजकल ,
सच क्या? झूठ क्या? फर्क ही न दिखे |
- पिंकी झा


