आज आज़ादी का जश्न मनाया ,
कुछ बातें सोच मन भर आया,
अपना मैंने क्या पाया,
आज़ाद कितनी मैं हिसाब लगाया,
खुद को बहुत बेड़ियों से बंधा पाया,
खोलना चाह कर भी खोल नहीं पाया,
हर कदम पर अपनी चाहतो को मार आया,
बस साँसे चलती रही बस जी नहीं पाया,
आज आज़ादी का जश्न मनाया |
- पिंकी झा


