यहाँ वहाँ से तुम्हारी बातें बहुत पता कर ली,
अब मिलकर पूछनी है l
इससे उससे जाना तुम्हे अबतक ,
अब मिलकर जानना है l
तस्वीरें चुपके से कई ली तुम्हारी,
अब कहकर तस्वीर खींचनी है l
कागज़ पर लिख इज़हार किया कई बार,
अब आमने सामने कहकर इज़हार करना है l
जवाब तुम्हारा सपनो में सुना कई बार,
अब जो सच है सुनना है l
अपनी दुनिया सपनो में बसाई कई बार,
अब हकीकत की दुनिया में हम कहा जानना है l
कहना जो है तुम्हे, कहते कहते रुके कई बार,
अब सारी झिझक छोड़ कहना है l
ज़माने , लोग और कई वजहों से डरे कई बार,
अब बेडर, बेख़ौफ़ जीना है l
कई बार जवाबो से डरकर चुप रह लिए ,
अब जवाब सुन उसी में खुश रहना है l
- पिंकी झा


