रात का गुप अँधेरा , 

बरांडे में जलती बल्ब की थोड़ी रौशनी , 

घड़ी चलने की आवाज , 

गली के कुत्तों का भोकना , 

कानों में फिरते मछरों की भीन-भीन , 

कमरे में फैली चुपी , 

और इन सब के बीच , 

रज़ाई में बंद मैं , 

नींद और उसमें तुम्हारे सपनो का इंतज़ार कर रही हूँ 

याद से आ जाना | 

 - पिंकी झा