अन्तः मन में बहुत से अवशेष बचे ,
अधिकार से किये अपहरण ,
अवरोध ये उथान के,
आलिंगन किये बैठे अपराधी ,
अवसाद भर चुके आँख तक ,
लगे मेरी अंत का अंकुर,
अपेक्षा अंतिम चरण तक पहुंची,
अक्षर का आश्रय भी नहीं,
बंद होता लगे जीवन का अख़बार ,
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