आज २ अक्टूबर,
न ये आम सा दिन है ,
हर दिन की तरह आज भी बहुतों का जन्मदिन है ,
दो महानायको का भी आज जन्मदिन है ,
एक बापू कहलाये , तो एक शास्त्री जी,
एक राष्ट्रपिता , एक कृषि कल्याण में मिल का पत्थर ,
आज दोनों ही नहीं जीवित,
पर इतिहास के पनो में अपना नाम गढ़ाकर गए ,
उसूल एक से दोनों के,
हाथ उठाने में नहीं, गले लगाने में मानते,
सीखाना चाहा सबको बहुत कुछ ,
अहिंसा परम धर्म है एक ने कहा ,
किसानो और जवानो की जय जयकार दूसरे ने,
मार्ग सुन्दर और सरल दिखाकर दोनों गए ,
पर अफ़सोस आज उनके जन्मदिन के अलावा हमे कुछ याद नहीं,
बातें कही उनकी किताबो में बस अब इसका भी मलाल नहीं,
हिंसा चारो और ,
किसान, जवान के मरने पर भी कोई प्रभाव नहीं,
छोड़िये गलतिया अपनी क्या गिने,
जन्मदिन की मुबारक देकर ही थोड़ा याद उन्हें करे |
- पिंकी झा


