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तुम्हारी यादों


तुम्हारी यादों का मौसम जाता ही नहीं हैहमें तुम बिन कुछ रास आता ही नहीं है

ये नग़मे, ग़ज़ले, दुनिया सबकुछ फिजूलदिल तेरी धुन के सिवा गाता ही नहीं है

— पिनाक मोढ़ा
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