था तो तू भी वही और मैं भी वही,

बदला तो वक्त था जो कि न तेरा था ना ही मेरा,

किस्मत कहां कब बदल जाए इसका क्या मालूम ,

जाना ना कभी सब्र करना तूने ना ही हमने,

कहां तक उम्मीद की जाए इसकी भी कहां किसी को उम्मीद

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