था तो तू भी वही और मैं भी वही,
बदला तो वक्त था जो कि न तेरा था ना ही मेरा,
किस्मत कहां कब बदल जाए इसका क्या मालूम ,
जाना ना कभी सब्र करना तूने ना ही हमने,
कहां तक उम्मीद की जाए इसकी भी कहां किसी को उम्मीद
✍️

था तो तू भी वही और मैं भी वही,
बदला तो वक्त था जो कि न तेरा था ना ही मेरा,
किस्मत कहां कब बदल जाए इसका क्या मालूम ,
जाना ना कभी सब्र करना तूने ना ही हमने,
कहां तक उम्मीद की जाए इसकी भी कहां किसी को उम्मीद
✍️